संघ चाहे जितनी सफाई दे राम मंदिर चढ़ावा कांड पर आरएसएस का मुखौटा उतर गया

राम मंदिर चढ़ावा कांड में 200 से 20000 करोड़ के  घोटाले के आरोपों  के सामने आने के बाद आरएसएस ने लगभग एक महीने से इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी। लेकिन लगता है अंदरखाने सभी हितधारकों के बीच इससे निपटने की कोई सहमति बन गयी है। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा कांड पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शुक्रवार को कहा कि पूरे हिंदू समाज (जिसमें आरएसएस भी शामिल है) के लिए यह स्वाभाविक है कि वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस घटना को एक “असाधारण मामला” माने और मंदिर के मैनेजमेंट और कामकाज में सभी कमियों को ठीक करने के लिए प्रभावी कदम उठाए, ताकि करोड़ों भक्तों की आस्था अटूट बनी रहे। सवाल है कि अभी बयान की ज़रूरत क्यों पड़ गई। क्या आरएसएस से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा पर कार्रवाई होने से संघ के दाग़ धुल जाएंगे। ये सवाल अब गलियारों में तैर रहे हैं।

पहले कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने रजिस्ट्रेशन की चिट्ठी लिख कर संघ के पंजीकरण एक ऐसा मुद्दा खड़ा कर दिया जिसका जवाब उनके पास नहीं है। और अब राममंदिर के चढ़ावे में संगठित लूट, जिसे ट्रस्ट से जुड़े प्रधानमंत्री के बेहद करीबी नृपेंद्र मिश्रा खुली डकैती कह रहे हैं, आरएसएस बुरी तरह उलझ गया है ।न संघ को उगलते बन रहा है न निगलते।  अगर वो फ़ौरन प्रतिक्रिया व्यक्त करता तो कहा जाता कि संघ ने गलती मान ली और उसके अपने ही लोग चोर निकले और देर से कार्रवाई हुई तो ये कहा जा रहा है कि बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है।

संघ दोनों तरफ से पिट रहा है। उसके अपने समर्थक आग उगल रहे हैं और खुल कर पूछ रहे हैं कि संघ चुप क्यों है?  मोहन भागवत चुप क्यों है? ये चोरी करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ है और संघ अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता ।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकांश प्रमुख पदों पर ट्रस्ट के गठन के साथ ही आरएसएस और उससे जुड़े विश्व हिन्दू परिषद्  से जुड़े लोग पदासीन रहे  हैं। चंपत राय स्वयं संघ परिवार के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं और ट्रस्ट के गठन से लेकर मंदिर निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने से यह सवाल बना रहेगा कि क्या ट्रस्ट की प्रशासनिक और वित्तीय निगरानी व्यवस्था में संस्थागत स्तर पर भी गंभीर खामियां थीं।

क्या इसके लिए आरएसएस जिम्मेदार नहीं है? आम जनमानस में यह धारणा बनती जा रही है कि राम मंदिर चढ़ावा कांड में 200 से 20000 करोड़ के घोटाले में नीचे से उपर के लोग शामिल हैं।

अयोध्या में रामलला मंदिर चढ़ावा चोरी होने की घटना पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बयान जारी किया। संघ ने कहा कि यह घटना केवल चोरी का मामला नहीं है, बल्कि इससे करोड़ों राम भक्तों की आस्था और श्रद्धा को गहरा आघात पहुंचा है। संघ ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जारी बयान में कहा कि श्री राम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष, करोड़ों राम भक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। यही कारण है कि यह मंदिर पूरे हिंदू समाज की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में अयोध्या स्थित श्री रामलला मंदिर के दान पात्रों में जमा धनराशि की चोरी की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

संघ ने कहा कि इस घटना से पूरे समाज और राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए इस मामले को सामान्य अपराध की तरह नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े गंभीर विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

संघ ने अपने बयान में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के आग्रह पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जांच दल की सिफारिश के आधार पर कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

संघ ने स्पष्ट कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि न्याय तभी पूरा माना जाएगा, जब दोषियों को कानून के अनुसार सख्त दंड मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

यह बयान उस विवाद में संघ  का पहला औपचारिक दखल है, जिसने राम लल्ला मंदिर से दान की रकम के गबन के आरोपों के बाद मंदिर प्रशासन को अपनी चपेट में ले लिया है। इस विवाद का सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि बढ़ते दबाव के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अपने पद से हटना पड़ा है।

जांचकर्ताओं ने कथित चोरी की जांच के सिलसिले में उनके ड्राइवर सहित अब तक आठ लोगों — अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव — को गिरफ्तार किया जा चुका है। टिन्नू, राय के लिए ड्राइवर का काम करता था; श्रीवास्तव, जो बैंक के रिटायर्ड कर्मचारी हैं, दान की गिनती की शिफ्ट के इंचार्ज थे; और बाकी छह लोग मंदिर में मिले दान की गिनती में शामिल थे।

संघ ने यह भरोसा भी जताया कि ट्रस्ट “उचित वित्तीय प्रबंधन, त्रुटिहीन और पारदर्शी संचालन प्रणालियों और पवित्रता, शुचिता और सच्ची धार्मिकता से भरे माहौल” के माध्यम से जनता का भरोसा बहाल करेगा।

डैमेज कंट्रोल के तहत सबसे पहले विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी चंपत राय की है। उल्लेखनीय है कि चंपत राय स्वयं वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं।

इसके बाद 3 जुलाई 2026 को भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे विनय कटियार ने चंपत राय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि चंपत राय की गिरफ्तारी भी हो सकती है और यह भी कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की है। अब संघ महासचिव होसबले का बयान भी आ गया।

दरअसल  राम जन्मभूमि आंदोलन से संघ  का पुराना और मुख्य जुड़ाव रहा है। संघ और उससे जुड़े संगठनों ने उस देशव्यापी अभियान को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके नतीजे में बाबरी विध्वंस और दशकों की राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक लामबंदी के बाद न्यायपालिका के सार्थक हस्तक्षेप के बाद मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर के उद्घाटन के बाद भी, ट्रस्ट पर संघ परिवार के वर्चस्व से  राम मंदिर चढ़ावा कांड ने संगठन की सार्वजनिक छवि को धुल धूसरित कर दी है।

दरअसल करोड़ों के राममंदिर चढ़ावा काण्ड ने संघ के चेहरे से एक सांस्कृतिक संगठन होने के दावे,ईमानदारी, शुचिता और सादगी का मुखौटा उतार दिया है।

(जनचौक ब्यूरो)

Leave a Reply